छत्तीसगढ़

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बड़ी राहत: अब पसंद की साड़ी खरीदने के लिए सीधे खाते में मिलेगी राशि

रायपुर, 25 जून 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी क्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के हित में एक बड़ा निर्णय लिया है। अब उनके लिए साड़ी की केंद्रीकृत खरीदी व्यवस्था समाप्त कर दी गई है और निर्धारित राशि सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि विभाग द्वारा वर्षों से संचालित साड़ी खरीदी की केंद्रीकृत व्यवस्था की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया है। हाल के दिनों में साड़ी खरीदी प्रक्रिया को लेकर प्राप्त सुझावों और उठे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है, जिससे व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी और कार्यकर्ताओं को अपनी पसंद के अनुसार साड़ी चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी।

मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप शासन की राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार तकनीक आधारित और पारदर्शी प्रशासनिक सुधारों को लगातार लागू कर रही है। विभाग का यह निर्णय उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि साड़ी का डिज़ाइन पूर्ववत रखा जाए तथा अंतिम स्वरूप आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं से चर्चा के बाद तय किया जाए। साड़ी का रंग और डिज़ाइन विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाएगा ताकि पूरे प्रदेश में एकरूपता बनी रहे। वहीं कपड़े के प्रकार जैसे कॉटन, सिंथेटिक या अन्य विकल्पों का चयन स्थानीय स्तर पर स्वयं कार्यकर्ता और सहायिकाएं कर सकेंगी।

मंत्री ने कहा कि विभाग आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका बहनों के सम्मान, सुविधा और अधिकारों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। विभागीय व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा की जा रही है और जहां भी सुधार की आवश्यकता होगी, वहां हितग्राहियों के हित में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की बाल विकास सेवा योजना के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को प्रतिवर्ष दो यूनिफॉर्म प्रदान करने का प्रावधान है। इसके लिए प्रति यूनिफॉर्म अधिकतम 500 रुपये की राशि निर्धारित है। विभाग के इस निर्णय को सुशासन, पारदर्शिता और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण आधारित प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे लाभार्थियों को अधिक सुविधा और निर्णय लेने का अधिकार मिलेगा।

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